जल है तो कल है: भूजल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान ने चलाया जागरूकता अभियान, लोगों से जल बचाने का किया आह्वान

बरेली सतेन्द्र प्रताप सिंह
राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान ट्रस्ट रजिस्टर्ड भारत नें जल स्तर दिन प्रतिदिन घटता जा रहा है लोग अपनी आवश्यकता अनुसार भूगर्भ से पंप सेट, सबमर्सिबल, नल, ट्यूबवेल लगाकर जल की आपूर्ति कर रहे हैं और भूजल दिन प्रतिदिन नीचे जा रहा है जिसकी चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान नें भूगर्भ जल संरक्षण कार्यक्रम बरेली में किया संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिकासिंघानिया क्षेत्रवासियों को जागरुक करते हुए कहा बरसात का पानी संचय होकर भूगर्भ में जनजीवन को जीने को बहुत जरूरी है भूगर्भ में जल संग्रह होने के साधन कच्ची भूमि एकमात्र है भूमि पर दिन प्रतिदिन कॉलोनयों, होटलों पक्की सड़कों का निर्माण हो रहा है जिससे भूमिगर्भ में जल भूमिगत होने के सोत्र कम हो रहे है जो की चिंताजनक है और जल की बर्बादी को रोकने को हम सबको जागरूक होना पड़ेगा रोजमर्रा के लिए घरेलू कार्यों में जल बचत होना हम सब की जिम्मेदारी है पानी का काम से कम उपयोग करें दंत मंजन करने में,बर्तन मांजने, फर्स धोने में, गाड़ी धोने में, रसोई का काम करते समय, अनावश्यक पानी की टोटी खोली ना छोड़े जरूरत अनुसार काम से कम पानी का इस्तेमाल करें व्यापारिक क्षेत्र में औद्योगिक प्रयोग में ले गए पानी का पुनः प्रयोग लाये, मोटर गैरेज से गाड़ी की धुलाई के पानी को कच्ची भूमि पर छोड़ें जिससे वह भूमिगत हो, निजी होटल, नर्सिंग होम व उद्योग आदि वर्ष का जल संग्रहण टॉयलेट बार गार्डन में उसका पानी प्रयोग होना आवश्यक हो गया है किसानों के लिए सुझाव दिया।
फसलों की सिंचाई क्यारी बनाकर करें, सिंचाई नालियों को पक्का करें, कैनवस पी.वी.सी पाइप का इस्तेमाल करें, बागवानी स्प्रिंगकलर विधि से करें, जिससे भविष्य में जल की किल्लत न हो कल के लिए जल संरक्षण आज से ही करें जल है तो कल है को समझें और सभी लोगों अपनानें का संकल्प लेने को जागरूक किया।
जन संरक्षण संकल्प कार्यक्रम राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिका सिंघानिया, राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र पाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश मेहंदीरत्ता, राकेश मौर्य, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दामोदर सिंह, राम किशोर जिलाध्यक्ष प्रकाशनी अंजू शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष आर्यन्द्र सिंह अंजू ठाकुर, पुष्पांजलि, आदि क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
